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तँवर / तोमर क्षत्रिय राजपुत वंश की कुलदेवी (चिलाय माता / योगमाया माता / सरूण्ड माता / मनसादेवी / शीतला माता)

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Tanwar Tomar /  तँवर तोमर क्षत्रिय राजपुत #वंश_कुलदेवी_दर्शन (चिलाय/योगमाया माता) 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 तु संगती तंवरा तणी चावी मात चिलाय ! म्हैर करी अत मात तू दिल्ली राज दिलाय !! तंवर अथवा तोमर क्षत्रियो की कुलदेवी माँ चिलाय माता का मूल स्थान मायन(बलवाड़ी) जिला रेवाड़ी हरियाणा में है, जहां कुलदेवी माता ज्वाला(योगेश्वरी) ने सफेद चील का रूप धारण करके राजा जयरथ के पुत्र बालक जाटूसिंह जी तंवर की रक्षा करी थी, उसके बाद ही तंवर राजपूतों कि कुलदेवी चिलाय माता के नाम से जानी जाती हैं। चिलाय माता जी को तोमर वंश," कुलदेवी" के रूप में पूजा आराधना करते हैं। इतिहास में तोमर वंश की कुलदेवी के अनेक नाम मिलते हैं जैसे चिलाय माता, जोग माया (योग माया), योगेश्वरी (जोगेश्वरी), सरूण्ड माता, मनसादेवी आदि।                                                                           ...

राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी

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               🙏  नागणेचिया माता 🙏      इन्हें राठेश्वरी माता, चकेश्वरी माता,नागाणा माता के नाम से जाना जाता है) राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी चक्रेश्वरी, राठेश्वरी, नागणेची या नागणेचिया के नाम से प्रसिद्ध है । नागणेचिया माता का मन्दिर राजस्थान में बाड़मेर जिले के नागाणा गांव में स्थित है। प्राचीन ख्यातों और इतिहास ग्रंथों के अनुसार मारवाड़ के राठौड़ राज्य के संस्थापक राव सिन्हा के पौत्र राव धूहड़ (विक्रम संवत 1349-1366) ने सर्वप्रथम इस देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाया । कर्नाटक से लाई गई थी नागणेची माता की प्रतिमा राजा राव धूहड़ दक्षिण के कोंकण (कर्नाटक) में जाकर अपनी कुलदेवी चक्रेश्वरी की मूर्ति लाये और उसे पचपदरा से करीब 7 मील पर नागाणा गाँव में स्थापित की, जिससे वह देवी नागणेची नाम से प्रसिद्ध हुई। नमक के लिए विख्यात पचपदरा बाड़मेर जोधपुर सड़क का मध्यवर्ती स्थान है जिसके पास (7 कि.मी.) नागाणा में देवी मंदिर स्थित है। जोधपुर में नहीं किया जाता था नीम की लकड़ी का प्रयोग अष्टादश भुजाओं वाली नागणेची महिषमर्दिनी का स...